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खेल पुरस्कारों में हो सकती है देरी, राष्ट्रपति भवन के निर्देशों का इंतजार

खेल मंत्रालय के अधिकारी ने कहा है कि कोरोना वायरस महामारी के कारण इस साल राष्ट्रीय खेल पुरस्कार समारोह में एक या दो महीने का विलंब होने की संभावना है.

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  • 29 अगस्त को दिए जाते हैं राष्ट्रीय खेल पुरस्कार
  • पुरस्कारों के लिए बड़ी संख्या में आए हैं आवेदन

कोरोना वायरस महामारी के कारण इस साल राष्ट्रीय खेल पुरस्कार समारोह में एक या दो महीने का विलंब होने की संभावना है. अंतिम फैसला राष्ट्रपति भवन से दिशा-निर्देश मिलने के बाद ही किया जाएगा. राष्ट्रीय खेल पुरस्कार के तहत भारत के राष्ट्रपति 29 अगस्त को राष्ट्रपति भवन में राजीव गांधी खेल रत्न, अर्जुन, द्रोणाचार्य और ध्यानचंद पुरस्कार देते हैं.

राष्ट्रीय खेल पुरस्कार महान हॉकी खिलाड़ी मेजर ध्यानचंद के जन्मदिवस के मौके पर दिए जाते हैं. लेकिन महामारी के कारण इस साल इनमें विलंब हो सकता है. खेल मंत्रालय के अधिकारी ने पीटीआई को बताया, ‘हमें अब तक राष्ट्रपति भवन से कोई निर्देश नहीं मिला है. हमें खेल पुरस्कारों को लेकर सूचना मिलने का इंतजार है. इसलिए इस समय यह कहना काफी मुश्किल है कि पुरस्कार कब दिए जाएंगे,’

उन्होंने कहा, ‘कोविड-19 के कारण अभी देशभर में लोगों के सार्वजनिक तौर पर जुटने पर प्रतिबंध हैं इसलिए राष्ट्रपति भवन में किसी समारोह का आयोजन नहीं किया जा रहा,’ अधिकारी ने कहा, ‘पहले भी पुरस्कार समारोह का आयोजन विलंब के साथ किया गया है इसलिए अगर 29 अगस्त को समारोह नहीं होता है, तो हम एक या दो महीने बाद भी इसका आयोजन कर सकते हैं. फिलहाल सभी का स्वास्थ्य और सुरक्षा प्राथमिकता होनी चाहिए.’

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महामारी के कारण खेल मंत्रालय को पिछले महीने पुरस्कारों के लिए ऑनलाइन आवेदन जमा कराने की समय सीमा बढ़ानी पड़ी थी. खिलाड़ियों को स्वयं को नामांकित करने की स्वीकृति भी दी गई थी. खुद को नामांकित करने की स्वीकृति मिलने के कारण पुरस्कारों के लिए बड़ी संख्या में आवेदन आए हैं, लेकिन खेल मंत्रालय ने विजेताओं का फैसला करने के लिए अब तक समिति का गठन नहीं किया है, जबकि निर्धारित समय के अनुसार समारोह के आयोजन के लिए सिर्फ एक महीने का समय बचा है.

पता चला है कि मंत्रालय ने अब तक आवेदनों की समीक्षा शुरू नहीं की है और विलंब होना लगभग तय है, मंत्रालय के एक सूत्र ने कहा, ‘इस साल निश्चित तौर पर खेल पुरस्कारों में विलंब होगा क्योंकि आवेदनों की समीक्षा मुश्किल काम है जो अभी शुरू नहीं हुआ है.’ उन्होंने कहा, ‘लेकिन पुरस्कार निश्चित तौर पर दिए जाएंगे. हकदार खिलाड़ियों और कोचों को पुरस्कार से वंचित करने का सवाल ही नहीं उठता.’

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