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शेन वॉर्न से ज्यादा झटके थे विकेट, फिर भी भारत के लिए नहीं मिला मौका

शेन वॉर्न ने ऑस्ट्रेलिया की तरफ से टेस्ट क्रिकेट में 708 विकेट लिये थे, जबकि भारत के राजिंदर गोयल ने फर्स्ट क्लास क्रिकेट में 750 विकेट झटके थे.

Rajinder Goel Rajinder Goel

रणजी ट्रॉफी में सर्वाधिक 750 विकेट लेने वाले भारत के पूर्व दिग्गज स्पिनर राजिंदर गोयल का रविवार को रोहतक में निधन हो गया था. वह 77 वर्ष के थे. बाएं हाथ के स्पिनर गोयल को बेहतरीन प्रदर्शन के बावजूद कभी भारतीय टीम में जगह नहीं मिली थी. राजिंदर गोयल को अगर शेन वॉर्न से बेहतर कहा जाए तो वह गलत नहीं होगा, क्योंकि 750 विकेट लेना बहुत बड़ी बात है. शेन वॉर्न ने ऑस्ट्रेलिया की तरफ से टेस्ट क्रिकेट में 708 विकेट लिये थे, जबकि भारत के राजिंदर गोयल ने फर्स्ट क्लास क्रिकेट में 750 विकेट झटके थे.

बेदी के दौर में खेलते थे गोयल

राजिंदर गोयल उस युग मे खेला करते थे जब बिशन सिंह बेदी जैसे स्पिनर भारत का प्रतिनिधित्व किया करते थे. इसी दौर में एक अन्य स्पिनर मुंबई के पदमाकर शिवालकर भी खेलते थे और उन्हें भी भारत की तरफ से खेलने का मौका नहीं मिला. इस दिग्गज स्पिनर को एक अच्छे क्रिकेटर ही नहीं बल्कि भले इंसान के रूप में भी याद किया जाता है. भारतीय क्रिकेट बोर्ड (बीसीसीआई) के पूर्व अध्यक्ष रणबीर सिंह महेंद्रा ने शोक व्यक्त करते हुए कहा, ‘यह क्रिकेट के खेल और निजी तौर पर मेरी बहुत बड़ी क्षति है. वह इस देश में बाएं हाथ के सर्वश्रेष्ठ स्पिनरों में से एक थे. संन्यास लेने के बाद भी उन्होंने इस खेल में बहुमूल्य योगदान दिया.’

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27 साल तक घरेलू क्रिकेट खेलते रहे गोयल

भारतीय टीम में जगह नहीं मिलने के बावजूद गोयल 1958-59 से 1984-85 तक घरेलू क्रिकेट में खेलते रहे. इन 26 सत्र में उन्होंने हरियाणा की तरफ से रणजी ट्रॉफी में 637 विकेट लिए जो राष्ट्रीय चैम्पियनशिप में रिकॉर्ड है. उन्होंने प्रथम श्रेणी क्रिकेट में कुल 157 मैच खेलकर 750 विकेट लिये. वह बेदी थे जिन्होंने गोयल को बीसीसीआई पुरस्कार समारोह में सीके नायडू लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड सौंपा था.

गोयल में लंबे स्पैल करने की अद्भुत क्षमता थी. जिस पिच से थोड़ी भी मदद मिल रही हो उस पर उन्हें खेलना नामुमकिन होता था. वह इतने लंबे समय तक खेलते रहे इसका अनुमान इससे लगाया जा सकता है कि वह विजय मांजरेकर के खिलाफ भी खेले और उनके बेटे संजय के खिलाफ भी.

राजिंदर गोयल को 1974-75 में वेस्टइंडीज के खिलाफ बेंगलुरू में टेस्ट मैच के लिए टीम में चुना गया था. वह 44 साल की उम्र तक प्रथम श्रेणी क्रिकेट खेलते रहे. सुनील गावस्कर ने अपनी किताब ‘आइडल्स’ में जिन खिलाड़ियों को जगह दी थी उसमें गोयल भी शामिल थे.

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गावस्कर ने अपनी किताब में किया था जिक्र

गावस्कर ने अपनी किताब में लिखा है कि गोयल अपने लिए नए जूते और किट लेकर आए लेकिन उन्हें 12वां खिलाड़ी चुना गया. अगले टेस्ट मैच में बेदी की वापसी हो गई, लेकिन गोयल को फिर कभी देश का प्रतिनिधित्व करने का मौका नहीं मिला. कपिल देव निश्चित तौर पर हरियाणा के सर्वश्रेष्ठ क्रिकेटर रहे हैं, लेकिन उनसे पहले गोयल थे जिन्होंने इस राज्य की गेंदबाजी की कमान बखूबी संभाल रखी थी.

कपिल देव की अगुवाई वाली हरियाणा ने जब 1991 में मुंबई को हराकर रणजी ट्रॉफी जीती थी तब गोयल उसकी चयनसमिति के अध्यक्ष थे. एक बार गोयल से पूछा गया कि क्या उन्हें इस बात का दुख है कि बेदी युग में होने के कारण उन्हें भारत की तरफ से खेलने का मौका नहीं मिल, उन्होंने कहा, ‘जी बिलकुल नहीं. बिशन बेदी बहुत बड़े गेंदबाज थे.’

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