तुर्कमान गेट दिल्ली का ऐतिहासिक स्थल है जहां पचास साल पहले भी बुलडोजर चर्चा का विषय था. 1967 में संजय गांधी की पहल पर तुर्कमान गेट के पास बसे लोगों की बस्तियां तोड़ी गईं ताकि जामा मस्जिद साफ़ नज़र आए. सरकारी आंकड़ों के अनुसार उस समय छह लोग मारे गए थे जबकि हकीकत में यह संख्या अधिक मानी जाती है. उस दौर में लोगों को मजबूरी में दिल्ली के अन्य इलाकों में रहना पड़ा.