सिद्दीकुल्लाह चौधरी का कहना है कि खाने के लिए बोलो राम जी ताकि पेट भर जाए, और पानी पीने के लिए भी बोलो राम जी जिससे प्यास बुझे. इसमें यह भाव व्यक्त किया गया है कि पैसे की आवश्यकता नहीं है, बल्कि राम जी चाहिए ताकि सच में काम हो सके. राम जी की महत्ता को नोट से ऊपर रखा गया है, जो आराम और भलाई के लिए आवश्यक है.