असदुद्दीन ओवैसी ने ममता सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि पिछले साल हाई कोर्ट ने 5 लाख से ज्यादा पिछड़ी जाति के सर्टिफिकेट रद्द किए थे. इनमें करीब 3 लाख सर्टिफिकेट मुसलमानों के थे. यह मामला उनके दोहरे चेहरे को दिखाता है और इस निर्णय के बाद जाति आधारित लाभों के दुरुपयोग पर सवाल उठते हैं. इस घटना ने समाज में पिछड़ी जाति के सर्टिफिकेट की जांच और सत्यापन पर ध्यान आकर्षित किया है. इससे यह साफ होता है कि गलत सर्टिफिकेट मिलने से समाज की न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित हो रही है.