उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे का एक साथ आना एक बड़ा राजनीतिक विषय है जो बीस सालों में पहली बार हुआ है. बाला साहेब ठाकरे की विरासत को लेकर दोनों के बीच मतभेद हैं. अगर ये दोनों दो हजार नौ में साथ आते तो महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा बदलाव आता, लेकिन अब दोनों ने अपने वोट बैंक खो दिए हैं. दोनों की विरासत खत्म हो रही है और उनकी पार्टियों को चुनाव में हार का सामना करना पड़ सकता है.