कोर्ट को यह तय करना था कि क्या मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त सामग्री मौजूद है. लगभग 600 पेज के आदेश में कोर्ट ने सभी सबूतों और गवाहों के बयानों का गहराई से विश्लेषण किया और कहा कि मुकदमा चलाने के लिए जरूरी कोई ठोस सबूत या गवाह का बयान नहीं है. कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा कि मामले में इतना भी सबूत नहीं है कि मुकदमा आगे बढ़ाया जा सके. इस निर्णय से यह स्पष्ट होता है कि कानून ने केवल मजबूत सबूतों वाले मामलों को ही आगे बढ़ाने का सही रास्ता चुना है.