सुनेत्रा पवार महाराष्ट्र की राजनीति में तो नई हैं लेकिन उनकी ताकत और कमजोरियां दोनों हैं. उन्होंने अभी तक पहली बार किसी सरकार में शपथ ली है और बीजेपी का पूरा समर्थन उनके साथ है. अजित पवार के निधन के बाद उनकी भूमिका में सहानुभूति उत्पन्न हुई है जो उनके लिए मजबूत पक्ष है. पार्टी के विधायकों का समर्थन भी उनके साथ है. इसके अलावा, पवार परिवार का नाम और बीजेपी का साथ उनके लिए खास मैदानी ताकत है. कमजोर पक्षों में एनसीपी के भीतर तालमेल की चुनौती और खुद का सरकार में अनुभव न होना शामिल है. इसके अलावा, वित्त मंत्रालय न मिलने की स्थिति भी एक बड़ी कमी है. अब देखना होगा कि वे देवेंद्र फडणवीस और एकता शिंदे के साथ कैसे काम करती हैं क्योंकि पिछली अच्छी वर्किंग रिलेशनशिप अजित पवार और फडणवीस के बीच थी. कुल मिलाकर, सुनेत्रा पवार का राजनीतिक सफर चुनौतियों और अवसरों से भरा है.