गाजियाबाद के इंदिरापुरम में रहने वाली 13 वर्षीय मानसी हिम्मत और जज्बे की मिसाल बन गई हैं. पांचवीं में पढ़ने वाली मानसी दोनों हाथों से दिव्यांग हैं, लेकिन उन्होंने इसे अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया. वह अपने पैरों से लिखती हैं, पढ़ाई करती हैं, पेंटिंग बनाती हैं और रोजमर्रा के काम भी खुद करती हैं. मानसी की मां मंजू घरों में काम करती हैं. आर्थिक तंगी के बावजूद उन्होंने बेटी को हमेशा आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया. उन्होंने एम्स में इलाज भी कराया, लेकिन डॉक्टरों ने हाथ ठीक न होने की बात कही.