उज्जवल निकम ने कहा कि अदालत में आर्गुमेंट के दौरान सवाल, कानून और तथ्य दोनों अलग-अलग होते हैं. मेरा जो केस चलता है, वे आमतौर पर संवेदनशील मामले होते हैं, सामान्य केस नहीं. जहां भी जाता हूं, वहां दर्शक रहते हैं जो सुनने के लिए उत्सुक रहते हैं. लोग बॉलीवुड फिल्मों में दिखाए गए कोर्ट के नाटकों और ड्रामों को समझकर असल कोर्ट की प्रक्रिया को अलग ग्रहण करते हैं.