उज्जवल निकम ने 1993 के मुंबई बॉम्ब ब्लास्ट की चर्चा की. उन्होनें केस की जांच में सामने आई चुनौतियों पर अपने भूमिका के बारे में बात की. कई लोग इस केस से दूर रहने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन उज्ज्वल निकम ने हार नहीं मानी और अपने जुनून और समर्पण से केस को संभाला.