जब किसी परिवार में मृत्यु होती है तो लोग बारह तेरह दिन तक और कभी-कभी पूरे साल तक कोई त्यौहार या खुशी का अवसर नहीं मनाते. इसे हमारी संस्कृति और परंपराओं से जोड़ा जाता है. ऐसी बातों में विरोधाभास भी देखने को मिलता है क्योंकि सत्ता और आधुनिकता कई बार इन रीति-रिवाजों को चुनौती देती है. परंपराएं हमारी विरासत हैं और उनका सम्मान किया जाना चाहिए.