स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने ब्रजेश पाठक को लेकर कहा कि ये विषय प्रसन्नता का है कि कम से कम एक नेता के रूप में सनातन धर्म की दार्शनिक पृष्ठभूमि को समझना आवश्यक है. हमारे द्वारा किए गए कार्यों से प्राप्त फल या पुण्य हो सकता है.