सुप्रीम कोर्ट ने गाजियाबाद के हरीश राणा को इच्छा मृत्यु की अनुमति दी है. सुनवाई के दौरान जज जे बी पदीवाला भावुक हो गए. हरीश जो कभी उज्ज्वल छात्र थे, हादसे के बाद उनकी जिंदगी पूरी तरह बदल गई. कोर्ट ने कहा कि जीवन के साथ-साथ गरिमा के साथ मृत्यु का भी अधिकार है. जस्टिस विश्वनाथन ने संस्कृत श्लोक के माध्यम से चिंता और चिता के बीच अंतर बताया.