पीएम मोदी ने अपने संबोधन में कहा, तीस साल पहले वह शांत रहती थी और बोलती नहीं थी. वह परिस्थिति को समझती थी लेकिन अपनी बात व्यक्त नहीं करती थी. आज वो वोकल हो गई हैं. इस बदलाव के साथ, वह लाखों बहनों में से एक है जो कभी न कभी पंचायत में काम कर चुकी हैं. उसने जनता के सुख और दुःख की समस्याओं का गहराई से अनुभव किया है.