गुजरात की झांकी भारत की स्वदेशी भावना और स्वतंत्रता संग्राम की प्रेरणा का महान प्रतीक है. इस झांकी में भिकाजी कामा और श्यामजी कृष्ण वर्मा जैसे स्वतंत्रता संग्राम के नायकों की यादें जीवंत होती हैं. वंदे मातरम जैसे स्वतंत्रता के गीतों को 1907 में पैरिस लेकर जाना और भारत की आज़ादी की कहानी दुनिया को बताना इस झांकी का विशेष महत्व है.