गाज़ियाबाद, अलीगढ़ और लखनऊ जैसे शहरों में आरोपियों ने कई जगहों पर रेकी की थी. पाकिस्तानी हैंडलर्स आरोपियों को गूगल लोकेशन भेजते थे. उसके आधार पर आरोपी सीधे मौके पर जाकर जांच करते थे. पूरी जानकारी वो वीडियो के रूप में भेजते थे. इस तरह की गतिविधियों से पता चलता है कि ये लोग संगठन के आदेश पर काम कर रहे थे और सटीक जानकारी इकट्ठा कर रहे थे. रेकी की ये कार्रवाई सुरक्षा चक्र को तोड़ने और संदिग्ध स्थानों की निगरानी के लिए थी. पाकिस्तानी हैंडलर्स के सीधे संपर्क में रहना, इनकी योजना को गंभीरता को दर्शाता है.