प्रेमानंद महाराज ने अपने प्रवचनों में ब्रह्म मुहूर्त को ध्यान, भजन और आध्यात्मिक साधना के लिए विशेष समय बताया है. उनके अनुसार यदि कोई व्यक्ति लगातार 21 दिनों तक इस समय नियमित अभ्यास करता है, तो उसमें सकारात्मक मानसिक बदलाव, अनुशासन और एकाग्रता विकसित हो सकती है. यह विचार उनके आध्यात्मिक प्रवचनों और पारंपरिक धार्मिक मान्यताओं पर आधारित हैं.