प्रयागराज का माघ मेला तप, त्याग और परंपराओं का जीवंत उत्सव है. यहां साधु संतों की साधना, कल्पवासियों की दिनचर्या और असंख्य पंडाल मिलकर एक अनोखा संसार रचते हैं. इसी संसार में एक पंडाल ऐसा भी है, जो भीड़ भाड़ और अस्थायी ढांचों के बीच स्थायित्व, साधना और आस्था की मिसाल बनकर खड़ा है. यह पंडाल झूसी पुल के नीचे है.