मोहन भागवत का कहना है कि हमारे देश में आदिवासी समुदाय धर्म और संस्कृति के आधार हैं. वेदों की जड़ें आदिवासियों से जुड़ी हैं. भारत के आदिवासी समाज में पूजा के विभिन्न प्रकार और उनसे जुड़ा तत्वज्ञान बहुत प्राचीन है. यह गलत धारणा है कि आदिवासियों का कोई धर्म नहीं होता. धर्म का अर्थ पूजा करना है और उनके पूजाओं के पीछे गहरा विचार और तत्वज्ञान भी मौजूद है.