मोहम्मद फैज खान स्पष्ट करते हैं कि मुसलमान चुनावी फसल नहीं हैं जिन्हें राजनीतिक पार्टियां अपने हित के लिए काटती हैं. वे बताते हैं कि मुस्लिम समुदाय को डीलर नहीं बल्कि सच्चे नेताओं की जरूरत है जो समाज सुधार की दिशा में काम करें. उन्होंने तुष्टिकरण की राजनीति खत्म करने और विचारधारा को मजबूत करने पर जोर दिया है ताकि देश विभाजन की जगह एकता की ओर बढ़ सके. साथ ही वे मुस्लिमों को डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम जैसे समाज सुधारकों को आगे बढ़ाने की सलाह देते हैं और कहते हैं कि देश की एकता के लिए वोट विवेक से देना बहुत जरूरी है.