राज्यसभा में सांसद राघव चड्डा ने डिब्बा बंद जूस को लेकर सवाल उठाते हुए पूछा कि जब हम फ्रूट जूस की बोतल खरीदते हैं तो उसके सामने बड़े और झकझोरने वाले जूसी फलों की तस्वीर होती है, लेकिन पीछे की तरफ छोटे टेक्स्ट में लिखा होता है कि ये तस्वीर केवल मार्केटिंग के लिए है. हमारे देश के ज्यादातर युवा इन ड्रिंक्स को स्वस्थ और पोषणयुक्त समझकर उपयोग करते हैं, पर असलियत में ये केवल चीनी का घोल होता है जो डायबिटीज, मोटापा और लाइफस्टाइल बीमारियों का कारण बनता है. बड़ा सवाल यह है कि सरकार इस धोखाधड़ी को रोकने के लिए क्या कदम उठा रही है ताकि उपभोक्ताओं को सही जानकारी मिल सके.