हिमाचल प्रदेश में मनरेगा योजना के तहत पंचायतों द्वारा रोजगार के अधिकारी बनाए जाते थे, जो अब समाप्त कर दिए गए हैं. पहले पंचायत प्रधान योजना बनाते थे और मनरेगा के जरिए कच्ची सड़कों का निर्माण होता था. गाँव के युवा और महिलाएं रोजगार के अवसर पैदा करते थे.