एक ऐसी यूनिवर्सिटी जो खुली तक नहीं थी और जिसके अस्तित्व की शुरुआत भी नहीं हुई थी, उसे इंस्टीट्यूट ओफ़ एमिनेंस का दर्जा दिया गया है. यह मामला केवल गलगोटिया यूनिवर्सिटी तक सीमित नहीं है. इस प्रकार का आउटरेज हमारे मौजूदा शैक्षणिक प्रतिमानों और व्यवस्थाओं के लिए एक गंभीर सवाल है. इस फैसले ने शिक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता और नियमों की सत्यता पर भी प्रश्न खड़ा किया है.