भारतीय राजनीति में अब नेता सिर्फ नेता नहीं रहना चाहते, वे परिवार बनना चाहते हैं. कोई चाचा बनता है, कोई ताऊ, कोई अम्मा-दीदी और अब सबसे नया राजनीतिक रिश्ता है… ‘मामा’. हमारे समाज में मामा सिर्फ माँ का भाई नहीं होता, वो इमोशन होता है. बचपन का क्राइम पार्टनर, लाड़-प्यार का दूसरा नाम और हर मुश्किल में खड़ा एक अपना इंसान, लेकिन अब यही ‘मामा’ भारतीय राजनीति में एक नई पॉलिटिकल ब्रांडिंग बन चुका है.