पश्चिम मध्यप्रदेश में एक इलाका ऐसा भी है, जहां उम्मीदवारों को अपनी बात मतदाताओं तक पहुंचाने के लिए कुछ अनिवार्य चलन का पालन करना पड़ता है. उनको गांव-गांव जाकर खाटला चौपालें लगानी पड़ती हैं और इसके बाद सेव-परमल का नाश्ता करवाना अनिवार्य है.