मध्यावधि चुनावों के दौरान ईरान की अधिकतर मांगें मान ली गईं, जिससे अमेरिका की साख को गंभीर नुकसान हुआ है. डोनाल्ड ट्रंप के शासनकाल के मुकाबले यह टूटा हुआ विश्वास ज्यादा गंभीर माना जा रहा हैय साथ ही, पश्चिम एशिया के क्षेत्र में ईरान एक प्रभावशाली शक्ति के रूप में उभरने में सफल रहा है.