उन्होंने उन देशों से मदद मांगी जिन्हें वह अपना दुश्मन मानते हैं. उनसे कहा कि वे आकर इस जलमार्ग को फिर से खोलने में मदद करें. लेकिन किसी ने कोई जवाब नहीं दिया क्योंकि ऐसा करना सम्भव नहीं था. अमेरिका का बेड़ा भी इस जलडमरू मध्य में घुसने की हिम्मत नहीं कर सकता, तो अन्य देशों की नौसैनिक ताकतों से उम्मीद करना मुश्किल है कि वे इसके करीब भी आएंगी.