मोसाद और अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए ने 13 मार्च से लारिजानी पर नजर रखी थी. इसके बाद जल्द ही मोसाद को उस जगह का पता चला जहां लारी जानी ईरानी बसीज फोर्स के कमांडर गुलाम रजा सुलेमानी के साथ बैठक कर रहे थे. यहीं दोनों एजेंसी ने उन्हें खत्म करने का प्लान बनाया और फिर अटैक किया गया.