इमरान मसूद ने कहा कि दिल्ली में हुए ब्लास्ट को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं. पता नहीं है कि कौनसा मॉड्यूल जिम्मेदार है और इससे पहले भी चेतावनी मिली थी कि ब्लास्ट हो सकता है. बावजूद इसके हादसा हुआ. इस मामले में कई परेशानियां हैं क्योंकि यह साफ नहीं है कि किसे आतंकवादी मानना चाहिए और कौन निर्दोष है. ये लोग अक्सर जेल में 20-20 साल के लिए जाते हैं और बाद में छूट जाते हैं. इस स्थिति ने सुरक्षा एजेंसियों के लिए चैलेंज पैदा कर दिया है कि कैसे भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सकता है.