एक कार्यक3म में सुधांशु त्रिवेदी ने बताया कि 1983 में इजरायल ने कहुटा के रिएक्टर पर बॉम्बर्डमेंट की पूरी जानकारी दी थी लेकिन उस समय भारत की सरकारें उस हिम्मत से पीछे रह गई. इसके अलावा सिर्फ पाकिस्तान ने ही एटॉम बॉम्ब बनाने का प्रयास किया और वह सफल रहा. यदि इराक, सीरिया या आईएसआईएस के पास न्यूक्लियर वारहेड होते तो हालात गंभीर होते.