पश्चिम बंगाल की राजनीतिक स्थिति में 1997 में अहम बदलाव आया, जब ममता बनर्जी ने अपनी अलग पहचान बनाने का निर्णय लिया. उस समय कांग्रेस के अंदर गुटबाजी बढ़ रही थी, जो नेतृत्व को कमजोर कर रही थी. इसके साथ ही लेफ्ट के प्रति नरम रवैये ने भी ममता को अंदर से झकझोर दिया था. इस घटना ने ममता को नई राजनीतिक राह अपनाने के लिए प्रेरित किया. इस बदलाव का पश्चिम बंगाल की राजनीति पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ा और ममता की स्वतंत्र राजनीतिक यात्रा शुरू हुई.