1967 में शुरू हुआ नक्सल आंदोलन उस दौर की सामाजिक असमानताओं और भारी बेरोजगारी का परिणाम था. कड़े प्रशासनिक कदमों और भूख ने सरकार की छवि को नुकसान पहुंचाया. इस परिस्थिति में मजदूर यूनियन, छात्र संगठन और किसान आंदोलनों ने मिलकर वामपंथी राजनीति के लिए नई जमीन बनाई. यह आंदोलन उन समस्याओं के खिलाफ एक प्रतिक्रिया था जो समाज को जकड़ रही थीं और जिससे अराजकता फैल रही थी. नक्सलवादी आंदोलन ने उस समय की राजनीतिक परिदृश्य को प्रभावित किया.