हरीश राणा, जो पंजाब यूनिवर्सिटी के छात्र थे, को पहली बार इच्छा मृत्यु की मंजूरी मिली है. साल 2013 में पीजी की चौथी मंजिल से गिरने के बाद उन्हें 100 प्रतिशत क्वाड्रिप्लेजिक डिसेबिलिटी हुई. इसके परिणामस्वरूप वह पिछले 13 सालों से परमानेंट वेजिटेटिव स्टेट में बिस्तर पर हैं.