संगम स्नान से शुरू हुआ विवाद अब शंकराचार्य की पदवी तक बढ़ गया है. मेला प्रशासन ने शंकराचार्य से उनकी पदवी का प्रमाण मांगा, जिसे स्वामी अविमुक्तेश्वर आनंद ने अपमानजनक और हिंदुओं की आस्था के खिलाफ बताया. उन्होंने आरोप लगाया कि मेला प्रशासन ने उन्हें गंगा स्नान से रोका तथा उनके शिष्यों के साथ भी मारपीट हुई.