स्वामी चिदानन्द सरस्वती का कहना है कि युद्ध जैसे कठिन हालात के बावजूद विश्व के लगभग 92 से 95 देशों के लोग योग महोत्सव में भाग ले रहे हैं. यह महोत्सव इतनी व्यापक स्तर पर आयोजित हो रहा है कि पूरा होने तक यह संख्या 100 देशों तक पहुंच सकती है. यह दर्शाता है कि योग का महत्त्व और इसकी लोकप्रियता कठिन परिस्थितियों में भी कम नहीं होती. विश्व के लोग योग को अपनाकर शांति और स्वास्थ्य की ओर कदम बढ़ा रहे हैं और इस महोत्सव के माध्यम से एकजुटता और सामूहिक ऊर्जा का संचार हो रहा है.