नेताओं से उम्मीदें तभी रखनी चाहिए जब वे अपने वादों और सिद्धांतों पर टिके रहें. कोई भी नेता अगर अपनी बातों पर खरा नहीं उतरता तो उससे उम्मीद रखना व्यर्थ है. प्रधानमंत्री ने चुनाव घोषणा पत्र में किसानों की आय दोगुनी करने का वादा किया था, लेकिन जब ये वादे पूरे नहीं होते तो जनता की नाराज़गी बढ़ती है. असली विश्वास तो उन्हीं नेताओं पर होता है जो देश हित में अड़ जाएं और अपने वादों को पूरा करें.