भारत में किसी भी सियासी पार्टी को यह पसंद नहीं होता कि मुस्लिम समुदाय की एक सियासी नेतृत्व बने. हालांकि मुस्लिम समुदाय संख्या में अल्पसंख्यक है, लेकिन देश का संविधान इसे अपनी आवाज उठाने का अधिकार देता है. वोट के माध्यम से मुस्लिम समुदाय अपनी लीडरशिप बना सकता है. कांग्रेस, बीआरएस या बीजेपी जैसी सभी प्रमुख पार्टियों में मुस्लिम नेतृत्व को सक्रिय और जिम्मेदार बनाकर मजबूत किया गया है.