अजित पवार की राजनीतिक यात्रा बारामती से शुरू हुई और वहीं समाप्त हुई. वे शरद पवार के बड़े भाई अनंतराव पवार के बेटे थे. पिता के निधन के बाद उन्हें पढ़ाई छोड़कर परिवार की जिम्मेदारियां संभालनी पड़ी. 1982 में राजनीति में कदम रखते हुए वे सहकारी चीनी मिल के सदस्य बने. 1991 में बारामती से लोकसभा चुनाव जीत कर उन्होंने अपनी राजनीतिक पहचान बनाई.