अजित पवार के निधन ने महाराष्ट्र की राजनीति में एक बड़ा राजनीतिक शून्य पैदा कर दिया है. बारामती में पवार परिवार का लंबे समय से प्रभुत्व था और उनका जाना परिवार, पार्टी और बारामती के लिए एक बड़ा नुकसान है. एनसीपी के कई नेता और मंत्री उनके साथ जुड़ी ताकत महसूस करते हैं. महाराष्ट्र सरकार में उनकी गैर मौजूदगी ने राजनीतिक असमंजस को जन्म दिया है.