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कचरा खाने को मजबूर हुए पोलर बीयर, Climate change का बुरा असर

Polar Bears Eating Garbage: आपको कचरा खाने को दिया जाए तो कैसा लगेगा? लेकिन मछली, छोटी लोमड़ियों का शिकार करने वाले पोलर बीयर अब इंसानों की वजह से कचरा खा रहे हैं. मजबूर हैं...क्या करें? क्लाइमेट चेंज की वजह से उनका इलाका जो पिघल रहा है.

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कनाडा के हडसन बे के पास कचरे में से खाना खोजकर खाता ध्रुवीय भालू. (फोटोः रॉयटर्स) कनाडा के हडसन बे के पास कचरे में से खाना खोजकर खाता ध्रुवीय भालू. (फोटोः रॉयटर्स)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • कनाडा, अलास्का और रूस में दिखे ऐसे नजारे
  • वैज्ञानिक भालुओं के इस व्यवहार से परेशान

मांस-मछली खाने वाले ध्रुवीय भालू (Polar Bear) अब कचरा खाने को मजबूर हो रहे हैं. वजह ये है कि उनका बर्फीला आशियाना पिघलता जा रहा है. इसके पीछे सबसे बड़ा कारण है जलवायु परिवर्तन (Climate Change) और वैश्विक गर्मी (Global Warming). जो बढ़ा है इंसानों द्वारा फैलाए जा रहे प्रदूषण और कार्बन उत्सर्जन की वजह से.  

पिछले हफ्ते कनाडा और अमेरिकी वैज्ञानिकों धरती के उत्तरी इलाकों में रहने वालों लोगों को चेतावनी दी कि वो कचरा न फैलाएं. कचरा डिपो को भालुओं के इलाके से दूर रखें. क्योंकि ध्रुवीय भालुओं (Polar Bears) की संख्या धीरे-धीरे कम हो रही है. अगर उन्हें उनके मन का खाना नहीं मिला, या फिर वो इस तरह इंसानों द्वारा फैलाई गई गंदगी खाने लगे तो उनके लिए यह नुकसानदेह होगा. 

कचरा खाने के लिए आने वाले भालुओं से इंसानों को भी खतरा रहेगा. अगर ध्रुवीय भालुओं (Polar Bears) को इंसानों का खून लग गया तो ये दोनों के बीच संघर्ष का मामला बन जाएगा. इंसानों और ध्रुवीय भालुओं (Polar Bears) के बीच होने वाले संघर्षों को लेकर जर्नल Oryx में हाल ही में एक रिपोर्ट भी पब्लिश हुई है. 

रूस के बेलुश्या गुबा में जलते हुए कचरे के पास खाना खोजता भालुओं का समूह. (फोटोः रॉयटर्स)
रूस के बेलुश्या गुबा में जलते हुए कचरे के पास खाना खोजता भालुओं का समूह. (फोटोः रॉयटर्स)

कचरा खाने से भालुओं में बढ़ेगी सेहत की दिक्कत

यूनिवर्सिटी ऑफ अलबर्टा के बायोलॉजिस्ट एंड्र्यू डेरोशर ने बताया कि कचरे के साथ भालुओं का यह संबंध बेहद खराब है. हम भूरे और काले भालुओं का हिसाब-किताब जानते हैं. वो इस तरह की हरकतें करते आए हैं. लेकिन ध्रुवीय भालुओं (Polar Bears) में यह लक्षण पहली बार देखने को मिला है. यह बेहद खतरनाक है. इससे भालुओं की इस खूबसूरत प्रजाति में कई तरह की बीमारियां और दिक्कतें पैदा हो सकती हैं. 

ये है बड़ी वजह, जिस लिए भालू खा रहे कचरा

आमतौर पर ध्रुवीय भालुओं (Polar Bears) के खाने के मेन्यू में सील्स, मछलियां, ध्रुवीय लोमड़ियां आदि होते हैं. आर्कटिक (Arctic) धरती के बाकी हिस्सों से चार गुना ज्यादा गर्म हो रहा है. यहां बर्फ गर्मियों के आने से पहले पिघलने लग रही हैं. सर्दियों के जाने के बाद जमना शुरू हो रही हैं. यह प्रक्रिया लेट हो रही है. इसलिए ये सफेद भालू ज्यादातर समय किनारों पर रहने को मजबूर हो जाते हैं. यानी अपने असली शिकार और भोजन से दूर. 

इंसानी इलाकों में बढ़ रहा है इनका आना-जाना

अब अपना पेट भरने के लिए ध्रुवीय भालुओं (Polar Bears) ने नया तरीका निकाला है. ये आर्कटिक और सब-आर्कटिक इलाके जैसे रूस का बेलुश्या गुबा (Belushya Guba) और अलास्का के काक्टोविक (Kaktovik) में इनका आना-जाना बढ़ गया है. क्योंकि बेलुश्या गुबा में कचरा मिल रहा है और काक्टोविक में व्हेल मछली की हड्डियों का जमावड़ा. 

इनकी वजह से बीमारियां होंगी, जहरीले पदार्थ फैलेंगे 

कनाडा के हडसन बे (Hudson Bay) के पास भी ध्रुवीय भालुओं (Polar Bears) का छोटा सा समुदाय कचरा खाते हुए देखा गया है. कई बार भालू कचरे से प्लास्टिक निकाल कर खाने लगते हैं. इससे उनका गला चोक होता है. उनकी जान भी जा सकती है. भालुओं को ये नहीं पता कि कचरा खाने से उन्हें क्या नुकसान होगा. प्लास्टिक पचा नहीं पाएंगे. बीमारियां होंगी. जहरीले पदार्थ शरीर में घर कर जाएंगे. 

आर्कटिक में 40 फीसदी बढ़ जाएंगे इंसान...ये भी बुरा

आर्कटिक इलाकों में इंसानों की संख्या बढ़ रही है. कनाडा के नुनावुत में जहां पर सबसे ज्यादा ध्रुवीय भालू (Polar Bear) रहते हैं. वहां पर इंसानों की संख्या में 2043 तक 40 फीसदी का इजाफा हो जाएगा. इंसान बढ़ेंगे तो कचरा भी बढ़ेगा. गर्मी भी बढ़ेगी. बर्फ पिघलेगी तो भालुओं का खाना दूर चला जाएगा. फिर वो इसी कचरे की तरफ आएंगे. या फिर इंसानों से उनका संघर्ष होगा.  

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