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DART Mission: कुछ ही दिन बचे हैं धरती का भविष्य तय करने वाले मिशन को पूरा होने में

सिर्फ 10-11 दिन ही बचे हैं. NASA दुनिया को बचाने के लिए एस्टेरॉयड से अपना डार्ट मिशन टकराएगा. अगर एस्टेरॉयड और उसके चांद की दिशा बदली तो पृथ्वी को एस्टेरॉयड्स के हमलों से सुरक्षित किया जा सकता है. यह प्रयोग अगर सफल रहा तो इंसानियत और विज्ञान के लिए यह ऐतिहासिक दिन होगा.

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NASA और SpaceX के DART Mission की 26 सितंबर को होगी डिडिमोस एस्टेरॉयड से टक्कर. (फोटोः नासा)
NASA और SpaceX के DART Mission की 26 सितंबर को होगी डिडिमोस एस्टेरॉयड से टक्कर. (फोटोः नासा)

26 सितंबर 2022 की तारीख ऐतिहासिक होने वाली है. पिछले साल छोड़ा गया डार्ट मिशन (Dart Mission) एक एस्टेरॉयड से टकराकर उसकी दिशा बदलने का प्रयास करेगा. अगर यह मिशन सफल होता है तो भविष्य में धरती को एस्टेरॉयड्स के हमलों से बचाना आसान हो जाएगा. क्योंकि धरती पर 'प्रलय' लाने की सारी आशंकाएं किसी एस्टेरॉयड हमले से ही जुड़ी हैं. इस मिशन को NASA और SpaceX ने मिलकर भेजा था. 

इस मिशन का मकसद सिर्फ इतना ही है कि अगर डार्ट मिशन एस्टेरॉयड के साथ घूम रहे चांद से टकराएगा. वह चांद फिर एस्टेरॉयड से टकराएगा. जिससे दोनों की दिशा बदल जाएगी. अगर दिशा बदलती है तो बड़ी उपलब्धि होगी. अगर नहीं तो मिशन में फिर बदलाव किया जाएगा. नया मिशन भी भेजा जा सकता है. डार्ट मिशन का स्पेसक्राफ्ट एस्टेरॉयड से करीब 24 हजार किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से टकराएगा. इस टक्कर से ठीक पहले स्पेसक्राफ्ट एस्टेरॉयड डिडिमोस के वातावरण, मिट्टी, पत्थर और सरंचना की स्टडी भी करेगा. 

मानव इतिहास में यह मिशन बहुत ज्यादा मायने रखती है. सफल हुई तो पृथ्वी को आकाशीय हमले से बचाया जा सकेगा. (फोटोः नासा)
मानव इतिहास में यह मिशन बहुत ज्यादा मायने रखती है. सफल हुई तो पृथ्वी को आकाशीय हमले से बचाया जा सकेगा. (फोटोः नासा)

क्या होगा इस मिशन के दौरान?

डार्ट मिशन यानी डबल एस्टेरॉयड रीडायरेक्शन टेस्ट (Double Asteroid Redirection Test - DART). जिस तकनीक के उपयोग से यह कार्य किया जाएगा, उसे काइनेटिक इम्पैक्टर टेक्नीक (Kinetic Impactor Technique) कहा जा रहा है. इस तकनीक से धरती की ओर आ रहे एस्टेरॉयड से स्पेसक्राफ्ट की टक्कर कराकर दिशा बदली जाएगी. जिस एस्टेरॉयड पर नासा DART से हमला करेगा उसका नाम है डिडिमोस (Didymos). 

डिडिमोस एस्टेरॉयड 2600 फीट व्यास का है. इसके चारों तरफ चक्कर लगाता एक चांद भी है. इसका नाम है डाइमॉरफोस (Dimorphos). DART की टक्कर डाइमॉरफोस से होगी. चंद्रमा का व्यास 525 फीट है. नासा इस छोटे चंद्रमा जैसे पत्थर को निशाना बनाएगा. फिर वह अपने एस्टेरॉयड से टकराएगा. इसके बाद दोनों की रफ्तार और दिशा में होने वाले बदलाव का अध्ययन किया जाएगा.  

NASA का डार्ट मिशन नई तकनीक का उपयोग कर रहा है, असफलता पर दूसरी तकनीक खोजी जाएगी. (फोटोः नासा)
NASA का डार्ट मिशन नई तकनीक का उपयोग कर रहा है, असफलता पर दूसरी तकनीक खोजी जाएगी. (फोटोः नासा)

DART स्पेसक्राफ्ट की स्पीड? 

NASA की प्लैनेटरी डिफेंस ऑफिसर लिंडली जॉन्सन ने कहा कि हमें इस टक्कर से नई तकनीक की क्षमता का पता चलेगा. यह भी जानकारी मिलेगी कि सिर्फ इतने से काम हो जाएगा या फिर धरती को ऐसे एस्टेरॉयड्स से बचाने के लिए कुछ नया तरीका खोजा जाए. तेज गति से स्पेसक्राफ्ट को डाइमॉरफोस से नहीं टकरा सकते. इससे खतरा ये है कि चांद अपने एस्टेरॉयड को छोड़कर अंतरिक्ष में किसी और दिशा में निकल सकता है. इससे मिशन फेल हो जाएगा. अगर टक्कर से चांद और उसके बाद डिडिमोस की गति में थोड़ा भी बदलाव आता है तो इसका मतलब मिशन सफल है. स्पेस में एक डिग्री कोण का बदलाव भी बड़ा असर डाल सकती है. धरती से एस्टेरॉयड के टकराव को रोक सकती है.

DART पर नज़र रखेगा दूसरा स्पेसक्राफ्ट 

DART स्पेसक्राफ्ट की सारी गतिविधियों पर लाइट इटैलियन क्यूबसैट फॉर इमेजिंग एस्टेरॉयड्स (LICIACube) भी साथ में जा रहा है. टकराव के समय यह यान एस्टेरॉयड के नजदीक से गुजरेगा ताकि टक्कर की फोटो ले सके. उसकी फोटो पृथ्वी पर भेज सके. नासा ने धरती के आसपास 8000 से ज्यादा नीयर-अर्थ ऑब्जेक्ट्स को दर्ज किया है. 

नासा द्वारा दर्ज किए गए नीयर-अर्थ ऑब्जेक्ट्स में कुछ 460 फीट व्यास से ज्यादा के हैं. अगर इस आकार का कोई पत्थर अमेरिका पर गिरता है तो वह किसी भी एक राज्य को पूरी तरह से खत्म कर सकता है. अगर यह समुद्र में गिरता है तो बड़ी सुनामी ला सकता है. हालांकि, नासा ने भरोसा दिलाया है पृथ्वी के चारों तरफ चक्कर लगा रहे 8000 पत्थरों में से एक भी अगले 100 सालों तक धरती से नहीं टकराएंगे. 

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