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वायरस जनित बीमारियों से बचाएगा आयुर्वेद का यह नुस्खा!

कोरोना काल में कई दवाएं ऐसी आईं जो वायरल इंफेक्शन से लोगों को बचाने का दावा करती हैं. लेकिन आयुर्वेद के परंपरागत फॉर्मूले पर रिसर्च करने के बाद बनाई गई एक स्वदेशी दवा वायरस जनित बीमारियों को काबू करने में कारगर पाई गई है. इस दवा पर लंबे समय से काम कर रहे बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) के आयुर्वेद विभाग के प्रोफेसर डॉ. केएन द्विवेदी ने कहा कि वायरस जनित बीमारियों सहित ये दवा डेंगू के इलाज में भी शानदार है.

डेंगू समेत कई वायरल बीमारियों से बचाती है ये आयुर्वैदिक दवा. (फोटोः गेटी) डेंगू समेत कई वायरल बीमारियों से बचाती है ये आयुर्वैदिक दवा. (फोटोः गेटी)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • इसमें मौजूद 5 औषधियां बचाती है वायरल इंफेक्शन से
  • रिसर्च पेपर्स में भी इस दवा को किया गया है प्रमाणित
  • इस समय फैले डेंगू सिरोटाइप-2 में भी यह दवा कारगर

कोरोना काल में कई दवाएं ऐसी आईं जो वायरल इंफेक्शन से लोगों को बचाने का दावा करती हैं. लेकिन आयुर्वेद के परंपरागत फॉर्मूले पर रिसर्च करने के बाद बनाई गई एक स्वदेशी दवा वायरस जनित बीमारियों को काबू करने में कारगर पाई गई है. इस दवा पर लंबे समय से काम कर रहे बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) के आयुर्वेद विभाग के प्रोफेसर डॉ. केएन द्विवेदी ने कहा कि वायरस जनित बीमारियों सहित ये दवा डेंगू के इलाज में भी शानदार है. 

इस दवा का नाम है फीफाट्रॉल (Fifatrol) प्रो. केएन द्विवेदी ने कहा कि डेंगू या कोरोना जैसे वायरस से निपटने की कोई आधुनिक दवा उपलब्ध नहीं है. लेकिन आयुर्वेद में कई ऐसी जड़ी-बूटियां हैं जो व्यक्ति की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाकर वायरस-बैक्टीरिया के संक्रमण से बचाती हैं. साथ ही संक्रमण ज्यादा बढ़ने नहीं देती हैं. इससे बीमारी नियंत्रित रहती है. ये दवाएं संक्रमण को जल्द खत्म कर देती हैं.

प्रो. द्विवेदी ने कहा कि फीफाट्रॉल में पांच औषधियां सुदर्शन वटी, संजीवनी बटी, गोदांती भस्म, त्रिभुवन कीर्ति रस और मृत्युंजय रस मौजूद है. ये औषधियां प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाती हैं. बुखार को काबू करती हैं. वायरस संक्रमण के शरीर पर घातक प्रभावों को कम करती हैं. इसमें आठ अन्य बूटियों तुलसी, कुटकी, चिरायता, मोथा, गिलोय, दारुहल्दी, करंज, अपामार्ग के भी विशेष औषधीय गुण भी हैं. अपामार्ग और करंज वायरस के जहरीले प्रभावों को निष्क्रिय करते हैं. कुटकी लीवर को ठीक करती है. तुलसी और गोदांती भस्म में एंटी-वायरल गुण हैं. यह वायरस के प्रभाव को खत्म करती है. त्रिभुवन कीर्ति रस जुकाम को कम करता है. संजीवनी वटी से पसीना निकलता है, जिससे शरीर का तापमान गिरता है. 

इसमे पहले AIIMS भोपाल ने फीफाट्रॉल पर किए गए अध्ययन में दावा किया था कि यह आयुर्वेद की एंटीबायोटिक दवा है, जिसमें बैक्टीरिया और फंगल संक्रमण को नियंत्रण करने के गुण हैं. नई दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (AIIA) के डॉक्टरों ने भी फीफाट्रॉल दवा को संक्रमित मरीजों पर असरदायक पाया. इसे जर्नल ऑफ आयुर्वेद केस रिपोर्ट में प्रकाशित किया था. 

प्रो. द्विवेदी ने कहा कि डेंगू के मरीजों में इस दवा का सकारात्मक असर देखा गया है. आजकल फैले डेंगू सिरोटाइप-2 में भी यह दवा कारगर है. सिरोटाइप-2 डेंगू का चार वैरिएंट में सबसे खतरनाक माना जाता है. इसे एमिल फार्मास्युटिकल नाम की कंपनी ने बनाया है. इसलिए आयुर्वेद के फार्मूले से इसके खतरे को कम किया जा सकता है.  

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