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साइंस न्यूज़

यूरोप के ऊपर अजीबो-गरीब रोशनी दिखी, वजह जानकर हैरान हुए वैज्ञानिक

Strange Glow Over Europe
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ये बात है पिछले महीने की, जब अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन (International Space Station) पर मौजूद वैज्ञानिकों ने यूरोप के ऊपर अजीबो-गरीब चमक देखी. सफेद-नीले रंग की रोशनी. ऐसे लग रहा था कि यूरोप के ऊपर वायुमंडल में कोई खतरनाक विस्फोट हो गया हो. हालांकि, स्पेस स्टेशन पर मौजूद एक एस्ट्रोनॉट ने इसकी तस्वीर ली और सोशल मीडिया पर पोस्ट किया. उन्होंने यह बताया कि यह घटना कैसे घटी? ये रोशनी कहां से आई? (फोटोः EZA/NASA)

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अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन (International Space Station - ISS) पर मौजूद फ्रांसीसी एस्ट्रोनॉट थॉमस पिके (Thomas Pesquet) ने बताया कि यह सफेद-नीली रोशनी देखकर स्पेस स्टेशन के सभी वैज्ञानिक हैरान रह गए. क्योंकि ये काफी देर तक दिखाई दे रही थी. कम-ज्यादा हो रही थी. स्पेस स्टेशन जब अगली ट्रिप में उस स्थान पर पहुंचा तो रोशनी धीमी पड़ चुकी थी. लेकिन उसे समझने के लिए पर्याप्त समय मिल गया. थॉमस ने इस तस्वीर को ट्वीट किया. (फोटोः EZA/NASA)

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थॉमस ने बताया कि यह ट्रांसिएंट ल्यूमिनस इवेंट (Transient Luminous Event) है. यानी धरती के ऊपरी वायुमंडल में जब ढेर सारी बिजलियां एकसाथ कड़कती हैं तो ऐसी रोशनी होती हैं. यह बेहद ही दुर्लभ नजारा होता है. क्योंकि धरती के ऊपरी वायुमंडल में बिजली के पैदा होने और कड़कने की घटना कम देखने को मिलती है. (फोटोः गेटी)

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थॉमस ने बताया कि इस नजारे को यूरोप के कोलंबस लेबोरेटरी ने भी देखा. यह लेबोरेटरी ISS पर ही स्थित है. वह धरती के ऊपर चमकने वाली रोशनियों का अध्ययन करने के लिए बनाई गई है. मजा इस बात का था कि जब यह रोशनी यूरोप के ऊपर ऊठ रही थी, तब स्पेस स्टेशन भूमध्यरेखा यानी इक्वेटर की लाइन के ऊपर निकल रहा था. जहां से यह नजारा और खूबसूरत हो गया था. (फोटोः गेटी)

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थॉमस द्वारा ली गई तस्वीरों और कोलंबस लेबोरेटरी के डेटा का विश्लेषण करने पर पता चला कि धरती के ऊपरी वायुमंडल के ऊपर थंडरस्टॉर्म आया था. जिसकी वजह से बिजलियां आपस में कड़कती रहीं. यह नजारा दशकों बाद देखने को मिला है. इससे पहले इस तरह के नजारे की तस्वीर एस्ट्रोनॉट आंद्रियास मोगेनसेन ने लिया था. उन्होंने यह सफलता दशकों पहले स्पेस स्टेशन पर पहुंचने के दस दिन बाद ही हासिल कर ली थी. (फोटोः गेटी)

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थॉमस ने इस तस्वीर को ट्वीट तो किया ही, उससे पहले उन्होंने फ्लिकर पर भी पोस्ट किया. जिसमें उन्होंने फ्रांसीसी और इंग्लिश भाषा में इस फोटो के बारे में डिटेल में बताया. थॉमस ने बताया कि ISS में यह क्षमता है कि वह वायुमंडलीय गतिविधियों का अध्ययन कर सके. इसलिए तो उसे धरती के ऊपर चक्कर लगाने के लिए तैनात किया गया है. (फोटोः गेटी)

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इस तरह की अंतरिक्षीय गतिविधियां कई बार फैंटेसी बनाने में मदद करती है. यानी साइंस-फिक्शन. कुछ लोग इसे एल्व्स (Elves) और स्प्राइट्स (Sprites) कहते हैं. हालांकि, ये हमारे वायुमंडल और जलवायु पर उतना असर नहीं डालते, जितना डालना चाहिए. (फोटोः गेटी)

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थॉमस कहते हैं कि पहले जब एस्ट्रोनॉट्स और पायलट्स ऐसी रोशनियों को देखते तो उन्हें भरोसा नहीं होता था. लेकिन धीरे-धीरे यह दुर्लभ नजारे दिखने लगे. उनके आसपास से एस्ट्रोनॉट्स और स्पेस स्टेशन गुजरने लगे तो भरोसा करना पड़ा. फिर उनका अध्ययन करना शुरु किया गया. इसके बाद पता चला कि ये क्या है. (फोटोः गेटी)