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प्रेम, विवाह और करियर में सफलता देता है फ़िरोज़ा

फिरोज़ा को अंग्रेजी में टरक्वाइश (Turquoise) भी कहते हैं. इसे धारण करने से ज्ञान प्राप्त होता है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है.

फिरोजा धारण करने के लाभ फिरोजा धारण करने के लाभ

फिरोज़ा को अंग्रेजी में टरक्वाइश (Turquoise) भी कहते हैं. यह गहरे नीले रंग का रत्न होता है. फिरोज़ा बृहस्पति ग्रह का रत्न होता है. राहु -केतु को शांत करता है. धोखा नहीं होता है इसलिए इसे धारण करने से ज्ञान प्राप्त होता है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है. इसे धन के प्रतीक के रूप में जाना जाता था और इसे इसकी इलाज़ की शक्तियों के लिए सबसे अच्छा माना जाता है.

फ़िरोज़ा के लाभ क्या हैं?

यह आपके आत्म-सम्मान और विश्वास को बढ़ाने में मदद करता है.

यह आपकी मांसपेशियों की शक्ति को बढ़ाता है और आपको बुरी आत्माओं से बचाता है.

फिरोज़ा को सहानुभूति का उपचार रत्न भी कहा जाता है जिससे पहनने वाले की संवेदनशीलता और सोच शक्ति में सुधार होता है.

यह दुर्भाग्य को खत्म कर सौभाग्य प्रदान करता है और इस कारण जातक को बेहतर स्वास्थ्य, धन, ज्ञान, प्रसिद्धि और ताकत मिलती है.

फिरोज़ा रत्न पहनने से व्यक्तित्व में आकर्षण आता है और रचनात्मक शैली सुधरती है.

प्रेम, विवाह और करियर में सफलता देता है फ़िरोज़ा

विवाह  में देर होने से परेशान लोग इस रत्न को धारण कर सकते हैं.

प्यार में हैं और अपने प्यार को समाज में एक मुक़ाम देना चाहते हैं,

वो भी इस रत्न को धारण कर सकते हैं.

प्रेम संबंधों के लिए यह रत्न बहुत प्रभावी है.

 करियर में सफलता के लिए या जो लोग कलात्मक है,

वो भी फिरोज़ा रत्न को धारण कर सकते हैं.

कौन-कौन धारण करें फ़िरोज़ा

हर  राशि के लोगों के लिए फिरोज़ा रत्न लाभ देता है.

फिल्मी कलाकार, व्यवसायी व पेशे से आर्किटेक्चर, चिकित्सक और इंजीनियर

भी इस रत्न को पहन सकते हैं.

आत्म-विश्वास महसूस कर सकता है.  साहस  बढ़ता है

यदि निजी रिश्तों में कोई तनाव या समस्या है तो

फिरोज़ा को धारण करने से इन सभी परेशानियों से मुक्ति मिल सकती हैं.

इसके प्रभाव से लोकप्रियता व मित्रता में भी बढ़ोत्तरी होती है.

फ़िरोज़ा धारण करने का तरीका

फिरोज़ा रत्न गुरुवार के दिन पर पहना जाना चाहिए

 पहनने वाले के लिए वह रत्न अनुकूल हो सके.

स्नान करने के बाद ही अंगूठी को धारण करना चाहिए

 इससे पहले अंगूठी को कच्चे दूध व गंगाजल के मिश्रण में डुबोए रखें

ताकि वह शुद्ध हो जाए.

 पूजा-अर्चना करने पर ही अंगूठी धारण करनी चाहिए.

 इस रत्न को आप सोने या तांबे के धातु में

बनवाकर धारण कर सकती हैं.

कब धारण करें

फिरोज़ा पहनने के लिए सबसे अच्छा दिन शुक्रवार है

आप चाहें तो इस रत्न को बृहस्पति या शनिवार के दिन

भी धारण कर सकते हैं.

 फिरोज़ा रत्न को धारण करने का सबसे शुभ समय प्रातः

6 बजे से 8 बजे तक होता है

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