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पुरी में शुरू हुई श्री मंदिर परिक्रमा परियोजना, जानें इसके बारे में सब कुछ

श्री मंदिर परिक्रमा मार्ग परियोजना में तीर्थयात्रियों की सुविधाओं का विशेष ख्याल रखा गया है. हर दिन भारत भर से बड़ी संख्या में भक्त महाप्रभु श्री जगन्नाथ के दर्शन के लिए पुरी आते हैं. उनकी सुविधाओं की व्यवस्था करना एसजेटीएमसी की जिम्मेदारी है. लोगों की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए ही श्री जगन्नाथ मंदिर प्रबंधन समिति ने श्री मंदिर परिक्रमा की परियोजना शुरू की है.

श्री मंदिर परिक्रमा परियोजना में तीर्थयात्रियों की सुविधाओं का विशेष ख्याल रखा गया है श्री मंदिर परिक्रमा परियोजना में तीर्थयात्रियों की सुविधाओं का विशेष ख्याल रखा गया है
स्टोरी हाइलाइट्स
  • श्री मंदिर परिक्रमा परियोजना
  • प्रोजेक्ट लोगों के लिए खास सुविधाएं
  • जानें इस भव्य परियोजना के बारे में

महाप्रभु श्री जगन्नाथ, भारत और दुनिया भर में लाखों लोगों के आराध्य देवता हैं. हर दिन भारत भर से बड़ी संख्या में भक्त महाप्रभु श्री जगन्नाथ के दर्शन के लिए पुरी के जगन्नाथ मंदिर आते हैं. उनकी सुविधाओं की व्यवस्था करना एसजेटीएमसी (श्री जगन्नाथ मंदिर प्रबंधन समिति) की जिम्मेदारी है. अब श्री जगन्नाथ मंदिर प्रबंधन समिति ने श्री मंदिर परिक्रमा परियोजना शुरू की है. 

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श्री मंदिर परिक्रमा परियोजना

पुरी के जगन्नाथ मंदिर की सभी संपत्तियों के प्रबंधन के लिए, श्री जगन्नाथ मंदिर प्रबंधन समिति (SJTMC) को 'श्री जगन्नाथ मंदिर अधिनियम, 1955 (राष्ट्रपति द्वारा स्वीकृत) के तहत एक वैधानिक निकाय के रूप में गठित किया गया है. श्री मंदिर परिक्रमा परियोजना का कार्य ओडिशा सरकार द्वारा अपने पीएसयू, यानी ओडिशा ब्रिज एंड कंस्ट्रक्शन कॉर्पोरेशन लिमिटेड (OBCC) के माध्यम से किया जा रहा है. 

श्री मंदिर परिक्रमा परियोजना की खास बातें- श्री मंदिर परिक्रमा परियोजना पुरी में श्री जगन्नाथ मंदिर के चारों ओर 75 मीटर का गलियारा होगा. परियोजना का उद्देश्य मेघनाद पचेरी (श्री जगन्नाथ मंदिर की बाहरी दीवार) के चारों ओर बड़ा और मजबूत गलियारा बनाना है ताकि भक्तों और तीर्थयात्रियों को मंदिर, नीलचक्र और मेघनाद पचेरी का एक साथ नजारा देखने को मिल सके. श्री मंदिर परिक्रमा के तहत तीर्थयात्रियों की सुरक्षा और उनके लिए सुविधाएं बढ़ाने का काम भी होगा. इसमें तीन चीजों पर मुख्य रूप से काम किया जा रहा है. पहला हेरिटेज कॉरिडोर, दूसरा जन सुख-सुविधाएं और तीसरा मठ का पुनर्विकास.

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श्री मंदिर परिक्रमा में तीर्थयात्रियों के लिए विशेष सुविधाएं

हेरिटेज कॉरिडोर की खासियत- मेघनादा पचेरी से लगे श्री जगन्नाथ हेरिटेज कॉरिडोर (SJHC) के 75 मीटर के हिस्से को उत्तरी, दक्षिणी और पश्चिमी तरफ नौ क्षेत्रों में बांटा गया है. इसमें 7 मीटर का ग्रीन बफर ज़ोन और 10 मीटर आंतरिक प्रदक्षिणा है जिसका इस्तेमाल श्री मंदिर परिसर की परिक्रमा के लिए आम जनता द्वारा किया जाएगा. हालांकि, इसमें सर्विस वाहन और आपातकालीन उद्देश्यों के लिए सीमित वाहन भी जा सकेंगे. 14-मीटर लैंडस्केप जोन में तरह-तरह के पेड़ और झाड़ियां लगाई जाएंगी, 8-मीटर बाहरी प्रदक्षिणा में तीर्थयात्रियों के लिए पेड़ों की छाया वाली पैदल मार्ग की सुविधा दी जाएगी. 

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बड़े और मजबूत गलियारे का होगा निर्माण

इसके अलावा, 10 मीटर सार्वजनिक सुविधा क्षेत्र, 4.5-मीटर सर्विस लेन, इमरजेंसी लेन, 7.5-मीटर मिश्रित यातायात लेन और 7-मीटर पेड़ों की छाया वाला फुटपाथ होगा. हेरिटेज कॉरिडोर के पूर्वी प्लाजा को एक बड़े खुले स्थान के रूप में प्रस्तावित किया गया है क्योंकि रथ यात्रा सहित श्री मंदिर के कई उत्सव यहीं से शुरू होते हैं. यह भक्तों की बड़ी सभा को सुरक्षित वातावरण मिलेगा. खास बात ये है कि हेरिटेज कॉरिडोर के 90% से अधिक हिस्से को खुले और हरे भरे स्थानों के रूप में विकसित किया जा रहा है.

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बड़े और खुले स्थान पर बनेगा हेरिटेज कॉरिडोर

जन सुख-सुविधाओं की व्यवस्था- हेरिटेज कॉरिडोर में लोगों के लिए विभिन्न सुख-सुविधाओं का ख्याल रखा गया है. मंदिर परिसर में प्रवेश करने के लिए कतार में लगने से पहले तीर्थयात्रियों को अपने सामान, जूते और मोबाइल फोन जमा करने के लिए क्लॉक रूम की सुविधा दी जाएगी. श्री जगन्नाथ रिसेप्शन सेंटर में 6,000 व्यक्तियों के कतार प्रबंधन की सुविधा, चार हजार परिवारों तक का सामान रखने के लिए क्लॉक रूम, पीने के पानी और शौचालय की सुविधा, हाथ-पैर धोने की सुविधा, किताब की दुकान सहित स्मारिका उपलब्ध कराई जाएगी.  तीर्थयात्रियों के लिए विश्राम स्थल बनाया जाएगा. इसके अलावा महिला-पुरुष शौचालय, पुलिस सेवा केंद्र, एटीएम, इलेक्ट्रिकल रूम और प्राथमिक चिकित्सा केंद्र जैसी सुख-सुविधाओं का लाभ लोग आसानी से उठा सकेंगे.

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जन सुख-सुविधाओं की व्यवस्था

मठ का पुनर्विकास- परियोजना के तहत 75 मीटर श्री जगन्नाथ हेरिटेज कॉरिडोर के भीतर मौजूद मठ मंदिरों के पुनर्विकास किया जाएगा. सामान्य और विशिष्ट परंपराओं में वास्तुकला की कलिंगन शैली को ध्यान में रखते हुए ये पुनर्विकास कार्य किया जाएगा. इसके अलावा, यह पुनर्विकास कार्य सभी मंदिरों के लिए गर्भ गृह, जगमोहन और नाता मंडप में भी किया जाएगा.

 

 

 

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