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कार्तिक पूर्णिमा: क्या है दान-स्नान का महत्व? 9 ग्रहों के पूजन से होगा लाभ

इस दिन शिव जी ने त्रिपुरासुर नामक राक्षस का वध किया था और विष्णु जी ने मत्स्य अवतार भी लिया था. इसी दिन गुरुनानक देव का जन्म भी हुआ था. इसे प्रकाश और गुरु पर्व के रूप में भी मनाया जाता है.

प्रतीकात्मक तस्वीर प्रतीकात्मक तस्वीर

कार्तिक मास की पूर्णिमा को कार्तिक पूर्णिमा कहा जाता है. इस पूर्णिमा का शैव और वैष्णव, दोनों ही सम्प्रदायों में बराबर महत्व है. इस दिन शिव जी ने त्रिपुरासुर नामक राक्षस का वध किया था और विष्णु जी ने मत्स्य अवतार भी लिया था. इसी दिन गुरुनानक देव का जन्म भी हुआ था. इसे प्रकाश और गुरु पर्व के रूप में भी मनाया जाता है.

इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने और दीपदान करने का विशेष महत्व है. कार्तिक पूर्णिमा पर दान करने का विशेष महत्व है. इस दिन दान करने से ग्रहों की समस्या को दूर किया जा सकता है. इस बार कार्तिक पूर्णिमा 12 नवंबर को यानी आज है.

किस प्रकार करें स्नान और दान?

- प्रातः काल स्नान के पूर्व संकल्प लें

- फिर नियम और तरीके से स्नान करें

- स्नान करने के बाद सूर्य को अर्घ्य दें

- साफ़ वस्त्र या सफेद वस्त्र धारण करें, फिर मंत्र जाप करें

- मंत्र जाप के पश्चात अपनी आवश्यकतानुसार दान करें

- चाहें तो इस दिन जल और फल ग्रहण करके उपवास रख सकते हैं

नौ ग्रहों के लिए किस प्रकार नौ दान करें?

- सूर्य के कारण ह्रदय रोग और अपयश की समस्या होती है

- इसके निवारण के लिए गुड़ और गेंहू का दान करें

- चन्द्रमा के कारण मानसिक रोग और तनाव के योग बनते हैं

- इससे बचने के लिए जल , मिसरी या दूध का दान करें

- मंगल के कारण रक्त दोष और मुकदमेबाजी की समस्या होती है

- इससे बचने के लिए मसूर की दाल का दान करें

- बुध के कारण त्वचा और बुद्धि की समस्या हो जाती है

- इसके निवारण के लिए हरी सब्जियों और आंवले का दान करना चाहिए

- बृहस्पति के कारण मोटापा, पाचन तंत्र और लिवर की समस्या हो जाती है

- इसके निवारण के लिए केला, मक्का और चने की दाल का दान करें

- शुक्र के कारण मधुमेह और आंखों की समस्या होती है

- इसके निवारण के लिए घी, मक्खन और सफेद तिल आदि का दान करना चाहिए

- शनि के कारण स्नायु तंत्र और लम्बी बीमारियां हो जाती हैं

- इसके निवारण के लिए काले तिल और सरसों के तेल का दान करना चाहिए

- राहु - केतु के कारण विचित्र तरह के रोग हो जाते हैं

- इसके निवारण के लिए सात तरह के अनाज, काले कम्बल और जूते चप्पल का दान करें

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