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आज है कालाष्टमी, शनि के प्रकोप से चाहते हैं बचना तो ऐसे करें कालभैरव की पूजा

हिंदू धर्म ग्रंथों के अनुसार हर महीने कृष्णपक्ष की अष्टमी तिथि को कालाष्टमी व्रत रखा जाता है. इस दिन कालभैरव की पूजा की जाती है.

प्रतीकात्मक फोटो (Getty Image) प्रतीकात्मक फोटो (Getty Image)

हिंदू धर्म ग्रंथों के अनुसार हर महीने कृष्णपक्ष की अष्टमी तिथि को कालाष्टमी व्रत रखा जाता है. इस दिन कालभैरव की पूजा की जाती है. कालभैरव भगवान शिव के ही अवतार माने जाते हैं. कहा जाता है कि इस दिन जो भी भक्त कालभैरव की पूजा करता है वो नकारात्मक शक्तियों से दूर रहता है.

मान्यता के अनुसार कलियुग में काल भैरव की उपासना करने से शीघ्र फल मिलता है. आइए जानते है काल भैरव को प्रसन्न करके मनचाहा फल पाने के लिए कालाष्टमी पर किस तरह करें पूजा.

इस माह 26 अप्रैल को यह व्रत पड़ रहा है. मान्यता है कि भगवान शिव उसी दिन भैरव के रूप में प्रकट हुए थे. इस दिन मां दुर्गा की पूजा का भी विधान है.

शुभ मुहूर्त-

अभिजीत-11:53 am से 12:45 pm

 अमृतकाल- 04:10 pm से 05:55 pm

विजय मुहुर्त-02:30 pm से 03:20 pm

काल भैरव की पूजा विधि-

-कालाष्टमी के दिन शिव जी के स्‍वरूप कालभैरव की पूजा करनी चाहिए.

-इस दिन सुबह जल्‍दी उठ कर स्नान करने के बाद व्रत का सकंल्प करना चाहिेए.

- इसके बाद किसी मंदिर में जाकर भगवान शिव या भैरव के मंदिर में जाकर पूजा करें.

-इसके बाद शाम को शिव पार्वती और भैरव  की पूजा करनी चाहिए.

-भैरव को तांत्रिकों का देव कहा जाता है. यही वजह है कि उनकी पूजा रात को होती है.

-भैरव की पूजा करने के लिए धूप, दीपक, काले तिल, उड़द और सरसों के तेल से पूजा कर आरती करें.

-व्रत कोलने के बाद काले कुत्‍ते को मीठी रोटियां खिलाएं.

काल भैरव मंत्र-

ॐ हं षं नं गं कं सं खं महाकाल भैरवाय नम:

मान्यता-

भैरव जी की पूजा व भक्ति से भूत, पिशाच एवं काल भी दूर रहते हैं.

-सच्चे मन से भैरव की पूजा करने से रुके हुए कार्य अपने आप बनते चले जाते हैं.

-माना जाता है कि कालाष्टमी के दिन कालभैरव की पूजा करने से सभी तरह के ग्रह-नक्षत्र और क्रोर ग्रहों का प्रभाव खत्म हो जाता है. सबसे मुख्य कालाष्टमी को कालभैरव जयंती के नाम से जाना जाता है.

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