
ड्रग्स की तस्करी के खिलाफ पुलिस की सख्ती बढ़ने के साथ ही तस्कर भी नए-नए तरीके ईजाद कर रहे हैं. पहले जहां तस्करी के लिए नाबालिग बच्चों का इस्तेमाल किए जाने के मामले सामने आते थे, वहीं अब तस्कर पुलिस की नजरों से बचने के लिए महिलाओं को ढाल बना रहे हैं.हालात यह हैं कि महिलाएं अब केवल छोटे स्तर पर नशे की पुड़िया बेचने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि अंतरराज्यीय स्तर पर लाखों रुपए के मादक पदार्थों की खेप लेकर सैकड़ों किलोमीटर का सफर तय कर रही हैं.
कोटा और आसपास के क्षेत्रों में सामने आए मामलों ने पुलिस की चिंता बढ़ा दी है. पिछले पांच वर्षों में अवैध ड्रग्स की तस्करी के करीब 50 मामलों में 38 महिलाओं की गिरफ्तारी हो चुकी है. इनमें कई महिलाएं ऐसी हैं जो बार-बार गिरफ्तार होने के बावजूद जेल से छूटकर फिर इसी अवैध कारोबार में लौट आती हैं.
तस्कर गिरोहों ने पुलिस जांच और नाकाबंदी से बचने के लिए महिलाओं को एक रणनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है. उनका मानना है कि यदि वाहन में महिलाएं और पारिवारिक माहौल नजर आए तो पुलिस की आशंका कम होगी और जांच भी हल्की रहेगी. इसी सोच के तहत महिलाएं पारिवारिक वेशभूषा में यात्रा करती हैं. परिवार के साथ घूमने-फिरने का आभास देती हैं और कार में रखे ड्रग्स को घरेलू सामान या सामान्य बैगों में छिपाकर ले जाती हैं. कई मामलों में महिलाएं स्वयं ड्राइव करती हैं ताकि किसी प्रकार का संदेह न हो.
जंगलों के रास्तों से तय कर रहीं सफर
हाल ही में कोटा ग्रामीण पुलिस ने एक ऐसे ही मामले का खुलासा किया जिसने तस्करों की नई कार्यप्रणाली को उजागर कर दिया. पुलिस ने कार्रवाई करते हुए करीब 6.15 लाख रुपए मूल्य का 41 किलो डोडा चूरा बरामद कर दो महिला तस्करों को गिरफ्तार किया. गिरफ्तार महिलाएं परमजीत कौर और गुलशन कौर पंजाब के लुधियाना की रहने वाली हैं. जांच में सामने आया कि दोनों महिलाएं मध्यप्रदेश से डोडा चूरा लेकर पंजाब जा रही थीं. सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि दोनों महिलाएं खुद कार चला रही थीं और मुख्य मार्गों की बजाय सुनसान तथा खतरनाक जंगलों वाले रास्तों का इस्तेमाल कर रही थीं ताकि पुलिस की निगाह से बचा जा सके.
पुलिस अधिकारियों के अनुसार दोनों महिलाएं इतनी शातिर थीं कि पुलिस की गतिविधियां देखते ही पहले से कार रोक लेती थीं, जिससे उन पर तत्काल संदेह न हो. डोडा चूरा को पान मसाला के बैगों में भरकर रखा गया था ताकि पहली नजर में वह सामान्य सामान लगे. कोटा ग्रामीण पुलिस ने दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे पर चेचट क्षेत्र के पास कार्रवाई करते हुए दोनों को गिरफ्तार किया.

पुलिस रिकॉर्ड बताते हैं कि पिछले पांच वर्षों में राजस्थान, पंजाब और मध्यप्रदेश से जुड़ी 38 महिला तस्कर करीब 50 मामलों में गिरफ्तार हो चुकी हैं. इनमें कई महिलाएं आदतन अपराधी बन चुकी हैं और बार-बार गिरफ्तारी के बावजूद इस धंधे से बाहर नहीं निकल रही हैं.
कोटा शहर की गुड्डी, शाहिदा, संजुबाई और ममताबाई जैसी महिला तस्कर अलग-अलग थानों में कई बार गिरफ्तार हो चुकी हैं. वहीं पंजाब की बलजीत कौर, जरनैल कौर और करतार कौर समेत जोधपुर की पूजा को भी लाखों रुपए कीमत के कई क्विंटल ड्रग्स के साथ गिरफ्तार किया जा चुका है.
बदल रहा है नशा तस्करी का चेहरा
विशेषज्ञों और पुलिस अधिकारियों का मानना है कि मादक पदार्थ तस्करी का नेटवर्क अब पहले की तुलना में अधिक संगठित और पेशेवर हो चुका है. तस्कर जानते हैं कि परिवार के साथ यात्रा कर रही महिलाओं पर सामान्य परिस्थितियों में कम संदेह किया जाता है. इसी कमजोरी का फायदा उठाकर वे महिलाओं को आगे कर रहे हैं.
पुलिस की बढ़ी सतर्कता
कोटा शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में लगातार सामने आ रहे मामलों के बाद पुलिस ने निगरानी बढ़ा दी है. नाकाबंदी, खुफिया सूचना तंत्र और विशेष अभियान के जरिए ऐसे नेटवर्क पर कार्रवाई की जा रही है. पुलिस अधिकारियों का कहना है कि चाहे तस्कर किसी भी रूप में सामने आएं, कानून से बच पाना संभव नहीं होगा.