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आंसुओं का कोई मज़हब नहीं होता

गोली-बारूद की आंखों पर पट्टी क्यों बंधी होती है? अगर ये पट्टी न होती तो शायद वो भी मां की ममता देख पाते और फिर शायद फटते ही नहीं. फटते तो ये देखकर फटते कि कहीं किसी मां का कोई लाल तो उसकी चपेट में नहीं आ रहा है.

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